Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट कराना कितना मà¥à¤¶à¥à¤•िल है
"मैं केवल 28 साल की हूं. इस उमà¥à¤° में मेरे तीन अबॉरà¥à¤¶à¤¨ हो चà¥à¤•े हैं. à¤à¤• बचà¥à¤šà¤¾ मरा हà¥à¤† पैदा हà¥à¤†. डॉकà¥à¤Ÿà¤° कहते हैं कि अब मेरा खà¥à¤¦ का बचà¥à¤šà¤¾ नहीं हो सकता. लेकिन मà¥à¤à¥‡ मेरा अपना बचà¥à¤šà¤¾ चाहिà¤. मैं सरोगेसी से बचà¥à¤šà¤¾ नहीं चाहती हूं. और न ही बचà¥à¤šà¤¾ गोद लेना चाहती हूं. आप बताइà¤, कà¥à¤¯à¤¾ हो सकता है?"
गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ के à¤à¤°à¥‚च की रहने वाली मीनाकà¥à¤·à¥€ वलाणà¥à¤¡ जब पहली बार डॉ. शैलेश पà¥à¤Ÿà¤‚बेकर से मिली तो वो बेहद निराश थी.
वह साल 2017 में अपà¥à¤°à¥ˆà¤² का महीना था. उमस à¤à¤°à¥€ गरà¥à¤®à¥€ में मीनाकà¥à¤·à¥€ अपनी मां और घर वालों के साथ डॉ. शैलेश के असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² पहà¥à¤‚ची थी.
डॉ. शैलेश पà¥à¤Ÿà¤‚बेकर देश à¤à¤° में यूटेरस (गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯) टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट के लिठजाने जाते हैं और पà¥à¤£à¥‡ के गैलेकà¥à¤¸à¥€ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ हैं.
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी, टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट
'अशरà¥à¤®à¤¾à¤¨ सिंडà¥à¤°à¥‹à¤®' कà¥à¤¯à¤¾ है ?
मीनाकà¥à¤·à¥€ के गरà¥à¤ में बचà¥à¤šà¤¾ ठहर नहीं पा रहा था, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनको 'अशरà¥à¤®à¤¾à¤¨ सिंडà¥à¤°à¥‹à¤®' नाम की बीमारी थी. इस बीमारी में महिलाओं को मासिक धरà¥à¤® न आने की समसà¥à¤¯à¤¾ होती है और यूटेरस (गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯) सालों तक काम नहीं करता है. अक़सर à¤à¤• के बाद à¤à¤• कई मिसकैरेज होने की वजह से यह बीमारी होती है, इसके अलावा पहली डिलिवरी के बाद, यूटेरस में 'सà¥à¤•ार' या खरोंच होने की वजह से à¤à¥€ यह बीमारी होती है.
अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ जरनल ऑफ अपà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¡ रिसरà¥à¤š में छपी à¤à¤• रिपोरà¥à¤Ÿ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में 15 फ़ीसदी महिलाà¤à¤‚ अलग- अलग वजहों से मां नहीं बन सकती हैं. जिनमें से 3 से 5 फ़ीसदी महिलाओं में यूटेरस की दिकà¥à¤•त इसके पीछे की वज़ह होती है.
मीनाकà¥à¤·à¥€ आखिरी बार दो साल पहले गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ हà¥à¤ˆ थी. "à¤à¤• वो दिन था और à¤à¤• आज का दिन है. मेरा सपना सच होने जा रहा है. मà¥à¤à¥‡ बेसबà¥à¤°à¥€ से नवंबर के पहले सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ का इंतज़ार है." मीनाकà¥à¤·à¥€ जिस असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ हैं वहां हर नरà¥à¤¸ और जूनियर डॉकà¥à¤Ÿà¤° से हर दिन à¤à¤• बार वो इस बात का ज़िकà¥à¤° ज़रूर करती हैं.
फिलहाल पिछले पांच महीने से मीनाकà¥à¤·à¥€ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ है. वो 21 हफà¥à¤¤à¥‡ की गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ है. मई 2017 में उनका यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट हà¥à¤† था. उनकी मां ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपना गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ दिया है.
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी, टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट
यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सà¥à¤ªà¥à¤²à¤¾à¤‚ट - आंकड़े कà¥à¤¯à¤¾ कहते हैं
दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट न के बराबर होते हैं. डॉ. शैलेश के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़ पूरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में अब तक केवल 26 महिलाओं का ही यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट किया गया है, जिनमें से केवल 14 ही सफल हà¥à¤ हैं.
जबकि कà¥à¤› मीडिया रिपोरà¥à¤Ÿà¥à¤¸ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• पूरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में 42 यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट के मामले सामने आठहैं. हालांकि केवल 8 मामलों में महिला ने टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट के बाद गरà¥à¤ धारण किया है.
आठमामलों में से सात सà¥à¤µà¥€à¤¡à¤¨ के हैं और à¤à¤• अमरीका का है. मीनाकà¥à¤·à¥€ का मामला à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾ का पहला है जहां यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट के बाद बचà¥à¤šà¤¾ पैदा होने कि पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में है.
मीनाकà¥à¤·à¥€ को यूटेरस उनकी अपनी मां ने दिया है. उनकी मां 49 साल की हैं. आम तौर पर इस तरह के टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट में डोनर की उमà¥à¤° 40 से 60 साल के बीच की होनी चाहिà¤.
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी, टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट
डॉ. शैलेश के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट की पहली शरà¥à¤¤ ही होती है कि डोनर महिला मां, बहन या मौसी हो.
देश में इस पर फ़िलहाल कोई क़ानून नहीं बना है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सांइस की इस विधा में अà¤à¥€ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सफलता नहीं मिली है.
डॉ. शैलेश के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• à¤à¤• बार डोनर मिल जाठतो, फिर लैपà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ोपी से यूटेरस निकाला जाता है. यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤Ÿ का मामला लिविंग टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट का मामला होता है. इसमें ज़िंदा महिला का ही यूटेरस लिया जा सकता है. पूरी पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में दस से बारह घंटे का वकà¥à¤¤ लगता है.
दूसरे ऑरà¥à¤—न डोनेशन की तरह किसी महिला के मरने के बाद यूटेरस डोनेट नहीं किया जा सकता.
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी, टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट
हाई रिसà¥à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी
डॉ. शैलेश के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• à¤à¤• बार यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤Ÿ हो जाठतो तकरीबन à¤à¤• साल बाद ही महिला का गरà¥à¤ बचà¥à¤šà¤¾ रखने के लिठतैयार हो पाता है, लेकिन वो à¤à¥€ सामानà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•िया से नहीं.
डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट के बाद अक़à¥à¤¸à¤° 'रिजेकà¥à¤¶à¤¨' का ख़तरा रहता है. यानी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में शरीर बाहर के ऑरà¥à¤—न को सà¥à¤µà¥€à¤•ार नहीं करता. इसलिठà¤à¤• साल तक मॉनिटर करने की जरूरत पड़ती है.
यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤Ÿ के बाद अगर महिला को बचà¥à¤šà¤¾ चाहिठतो à¤à¤®à¥à¤¬à¥à¤°à¤¾à¤¯à¥‹ यानी à¤à¥à¤°à¥‚ण को लैब में बनाया जाता है, और फिर महिला के बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ में सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ किया जाता है.
à¤à¥à¤°à¥‚ण बनाने के लिठमां के अंडाणॠऔर पिता के शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है. मीनाकà¥à¤·à¥€ के मामले में à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ ही किया गया. इस साल अपà¥à¤°à¥ˆà¤² के पहले सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में लैब में तैयार किठगठà¤à¥à¤°à¥‚ण को डॉ. शैलेश और उनकी टीम ने उनकी बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ में सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ किया.
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी, टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट
पिछले पांच महीने से मीनाकà¥à¤·à¥€ पà¥à¤£à¥‡ के उसी असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ की निगरानी में ही है.
डॉ. शैलेश इस तरह की पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी को हाई रिसà¥à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी क़रार देते हैं. उनके मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• मीनाकà¥à¤·à¥€ का परिवार किसी à¤à¥€ तरह का रिसà¥à¤• लेना नहीं चाहते और न ही डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ की टीम à¤à¥€.
इस तरह के हाई रिसà¥à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी की जटिलता के बारे में चरà¥à¤šà¤¾ करते हà¥à¤ डॉ. शैलेश कहते हैं, "मीनाकà¥à¤·à¥€ कई तरह की इमà¥à¤¯à¥‚न- सपà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚ट दवाइयों पर है. à¤à¤¸à¥‡ में पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान डायबिटीज़ का ख़तरा बढ़ जाता है. उसे मैनेज करना जरूरी होता है. साथ ही बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° à¤à¥€ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बढ़ने-घटने की गà¥à¤‚जाइश नहीं होती. इसलिठà¤à¥€ मीनाकà¥à¤·à¥€ को निगरानी में रखना ज़रूरी था."
मई 2017 से आज तक डॉ. शैलेश की टीम ने à¤à¤¾à¤°à¤¤ में छह यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट किठहै और उनका दावा है कि सà¤à¥€ सफल रहे हैं.
यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट के बाद होने वाली पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी इसलिठà¤à¥€ हाई रिसà¥à¤• होती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि डोनर के यूटेरस को पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी à¤à¥‡à¤²à¤¨à¥‡ की आदत नहीं होती. मीनाकà¥à¤·à¥€ के मामले में उनकी मां 20 साल पहले पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट हà¥à¤ˆ थी. 20 साल बाद कोई चीज़ बदलती है तो ज़ाहिर है कि दिकà¥à¤•तें होंगी है.
डॉ. शैलेश के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• मीनाकà¥à¤·à¥€ की डिलिवरी जब à¤à¥€ होगी तो पूरी तरह पà¥à¤²à¤¾à¤¨ कर कर सीज़ेरियन ही होगी.
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी, टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट
लेकिन सीजेरियन ही कà¥à¤¯à¥‹à¤‚?
डॉ. शैलेश विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से इस पूरी पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को समà¤à¤¾à¤¤à¥‡ हैं. यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤Ÿ के समय केवल यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट होता है, साथ के नसों को टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट नहीं किया जा सकता. इसलिठइस तरह की पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी में 'लेबर पेन' नहीं होता.
इस तरीके से पैदा हà¥à¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कितना ख़तरा रहता है?
इस पर डॉ. शैलेश कहते हैं, देश में ये अपनी तरह का पहला मामला है इसलिठहमारे पास पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¾ अनà¥à¤à¤µ नहीं है. विशà¥à¤µ में à¤à¥€ à¤à¤¸à¥‡ केवल 8 मामले ही आठहैं. उन मामलों में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दिकà¥à¤•त नहीं आई है. लेकिन मां को डिलिवरी के बाद रिकवरी में 12 से 15 हफà¥à¤¤à¥‡ का वक़à¥à¤¤ लगता है. हम मीनाकà¥à¤·à¥€ के मामले में à¤à¥€ à¤à¤¸à¥€ ही उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करते हैं.
अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ जरनल ऑफ अपà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¡ रिसरà¥à¤š के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़ यूटेरस टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट में सात से दस लाख रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ का ख़रà¥à¤š आता है.
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी से बचने के लिठये तरीक़े ख़ूब पसंद आ रहे
पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी में कितना और कà¥à¤¯à¤¾ खाना चाहिà¤?
| --------------------------- | --------------------------- |